बोर्ड एग्जाम की तैयारी: मैट्रिक और इंटर स्टूडेंट्स के लिए आखिरी 1 महीने की स्ट्रेटजी

बोर्ड एग्जाम की तैयारी: मैट्रिक और इंटर स्टूडेंट्स के लिए आखिरी 1 महीने की स्ट्रेटजी

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बोर्ड एग्जाम नजदीक आ रहे हैं, और मैट्रिक तथा इंटर के छात्रों के पास अब लगभग 1 महीने का समय बचा है। मैट्रिक वालों का तो कम से कम 1/2 महीने भी है, लेकिन इंटर वालों का तो 1 महीने समय बचा हुआ है। इस बचे हुए समय में स्टडी, तैयारी और एग्जाम प्रिपरेशन को लेकर क्या स्ट्रेटजी अपनानी चाहिए? इस लेख में हम तीन महत्वपूर्ण पॉइंट्स पर चर्चा करेंगे, जो आपको बेहतर परफॉर्मेंस, अच्छी स्कोरिंग और उच्च प्रतिशत लाने में मदद करेंगे। ये टिप्स अनुभवी शिक्षक की सलाह पर आधारित हैं, जो छात्रों की सामान्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए दिए गए हैं।

स्ट्रेस को दूर करें: एग्जाम को बस एग्जाम की तरह लें

मैट्रिक और इंटर एग्जाम के लिए 1 महीने का समय लगभग बचा हुआ है। मैट्रिक वालों का तो कम से कम 1/2 महीने भी है। लेकिन इंटर वालों का तो 1 महीने समय बचा हुआ है। तो अब इस 1 महीने के समय में इस बचे हुए टाइम में हमें क्या करना चाहिए? हमारी स्ट्रेटजी क्या होनी चाहिए? स्टडी को लेकर के, तैयारियों को लेकर के, एग्जाम के प्रिपरेशन को लेकर के और यह बोर्ड एग्जाम जो हमारा होने जा रहा है, इस एग्जाम में हम बेहतर परफॉर्म कर सके, अच्छी स्कोरिंग कर सके, बेहतर मार्क्स ला सके, बेहतर परसेंटेज ला सके। इसके लिए हमें क्या करना चाहिए? तो मैं तीन ऐसे पॉइंट्स आपको बताने वाला हूं जिसको फॉलो आपको हर हाल में करना है। क्योंकि देखिए इसको अगर आप फॉलो करते हैं तो ये 30 दिन जो बचे हुए हैं ना ये आपके बेहतरीन 30 दिन हो सकते हैं और इन 30 दिनों का मैक्सिमम बेनिफिट आप ले सकते हैं।

सबसे पहला काम तो यह करना है। अगर आप में से किसी छात्र ने अगर इस एग्जाम के टेंशन को दिमाग पे सवार कर लिया है तो पहले तो उसे उतार फेंकना है। एग्जाम ही है पार हो जाएगा। एग्जामिनेशन का टेंशन अपनी बात पर सवार नहीं होना चाहिए। एग्जामिनेशन को बस एग्जामिनेशन की तरह ही लेना है। ऐसा नहीं कि बहुत सारे बच्चे ऐसे होते हैं। मैंने देखा है मैं भी एक टीचर हूं। मैंने बहुत सारे ऐसे बच्चों को देखा है कि स्ट्रेस इतना ले लेते हैं बच्चे कोई-कोई कि उस स्ट्रेस की वजह से तो कई बार बीमार तक पड़ जाते हैं। अच्छा इतना जब आप प्रेशर लीजिएगा एग्जाम का इतना स्ट्रेस लीजिएगा तो उससे एक सबसे बड़ा नुकसान तो ये हो जाता है कि आप बचे हुए समय में अगर कुछ तैयारी भी करते हैं कुछ रिवीजन भी करते हैं कुछ पढ़ाई भी करते हैं तो वो याद नहीं होता। ना तो समझ में आता है, ना तो याद हो पाता है, फिजिक्स पढ़ते हैं, तो केमिस्ट्री का टेंशन लगा रहता है। केमिस्ट्री पढ़ते हैं तो मैथ का टेंशन लगा रहता है। और मैथ पढ़ रहे हैं तो बायो का टेंशन लगा हुआ है। उस तरह से ज्योग्राफी, हिस्ट्री और पोल साइंस वाले भी है, इकोनॉमिक्स वाले भी हैं। मतलब एक सब्जेक्ट पढ़ रहे हैं और ध्यान उस पे नहीं है। ध्यान लगा हुआ है दूसरे सब्जेक्ट पर। तो, यह स्ट्रेस की वजह से जो आप पढ़ते हैं, जो आप याद करते हैं, वह भी आपका दिमाग में नहीं रह पाता, टिक नहीं पाता, याद नहीं हो पाता, वो निकल जाता है। कोई फायदा ही नहीं हो पाता। तो सबसे पहले स्ट्रेस को दिमाग से निकालना है। एग्जाम को बस एग्जाम की तरह लेना है।

चलिए ठीक है। खुदा ना करे भगवान ना करे गॉड ना करे अगर कोई फेल ही हो गया तो क्या दिक्कत है? हम फिर से ट्राई करेंगे। ये बस एक एग्जाम है। ये अभी जो जिंदगी आपकी आगे आने वाली है ना इसमें तो इससे बड़े-बड़े इम्तिहान आपको देने पड़ेंगे। इससे बड़ी-बड़ी परीक्षाएं आपको देनी पड़ेगी। यह तो सिर्फ एक कागज कलम का इम्तिहान है ना। अभी तो बहुत सारी परीक्षाएं बाकी हैं। बहुत सारे इम्तिहान बहुत सारे ऐसी मुश्किल घड़ियां आने वाली है। अब इतने छोटे से एग्जाम से आप अगर घबरा जाएंगे इसमें फेल होने से अगर आप डर कर के और स्ट्रेस को टेंशन को दिमाग पर सवार कर लेंगे तो फिर तो बात ही खत्म हो गई। तो इसलिए पहले तो इस स्ट्रेस को अपने दिमाग से निकालना होगा। स्ट्रेस निकाल देंगे ना तो आप खुद देखेंगे कि जो भी हम पढ़ रहे हैं, जो भी हम रिवाइज कर रहे हैं, रिवीजन कर रहे हैं वो सारी बातें हमें याद हो रही है। हम उन बातों को अपने दिमाग में, अपने मेमोरी में सेव कर पा रहे हैं तो ये फायदा होगा आपको स्ट्रेस ना लेने से। ये पहला काम आपको करना है। स्ट्रेस बिल्कुल नहीं लेना है।

स्ट्रेस कम करने के प्रैक्टिकल टिप्स

अब ये स्ट्रेस को दिमाग से हटाए कैसे? तो एग्जाम को एग्जाम की तरह लीजिए। सुबह टहलने की आदत डालिए। इससे क्या होता है कि माइंड फ्रेश होता है। 10 मिनट का धूप लेना भी बहुत जरूरी होता है। उससे भी माइंड काफी रिलैक्स होता है। अब ये एक काम तो हमने कर लिया।

लिखने की प्रैक्टिस करें: याद करने और स्पीड बढ़ाने का बेहतरीन तरीका

अब दूसरा काम क्या करें? देखिए अब एक महीने का समय है। तो इस एक महीने के समय में जो है ना आप जो भी चीजें याद करना चाहते हैं, उस याद करने वाली चीजों को आप लिखना शुरू कर दीजिए। यह मेरा खुद का खुद का आजमाया हुआ चीज है। याद करने से कोई चीज उतना अच्छा याद नहीं होता जितना कि वो लिखने से याद हो जाता है। यह हकीकत है। आप खुद भी ट्राई करके देखिए। कोई चीज आप एक बार, दो बार, तीन बार लिख करके देखिए। कोई अगर किसी चीज की डेफिनेशन है, परिभाषा है और अगर आपको वो याद नहीं हो रहा, तो उस परिभाषा को उस डेफिनेशन को आप लिखिए। दो बार, तीन बार, चार बार लिखिए। आप देखिएगा कि आपको याद हो गया। तो आप लिखना शुरू कर दीजिए और खास करके उन चीजों को जो आपको याद नहीं होते हैं उनको लिखिए।

इससे दो फायदे होंगे। पहला फायदा तो ये होगा कि आपको वो चीज याद हो जाएगी। जो चीज आप याद करना चाह रहे हैं और वो याद नहीं हो रहा। लिखने से पहली बात तो ये कि वो याद हो जाएगा। और दूसरा फायदा यह होगा कि आपकी लिखने की प्रैक्टिस होगी। और एग्जाम तो भाई लिख के ही देना है। वहां पर तो कोई आपसे खड़ा करा कर पूछेगा नहीं ना कि भाई खड़ा हो जाओ। इस सवाल का जवाब दो। उस सवाल का जवाब दो। वहां पर तो आपको अपने आंसर या तो ओएमआर शीट पे देने हैं या फिर आपके आंसर बुक पे देने हैं, कॉपी पे देने हैं। लिख करके देना है। आप तो वहां होंगे नहीं ना। यानी एग्जामिनर जब कॉपी चेक करेगा तो कॉपी चेक करने वाले एग्जामिनर के सामने आप तो नहीं ना होंगे। आपकी कॉपी होगी। आपके लिखे हुए आंसर होंगे। तो जब आपकी राइटिंग अच्छी होती है तो उसका इंपैक्ट पड़ता है। उसका इंपैक्ट कॉपी चेक करने वाले टीचर पर पड़ता है। असर पड़ता है।

इसलिए आप जब लिखना शुरू कर देंगे। ठीक है? आप डेली एक घंटा ही लिखने का डालिए ना। आप डेली 1 घंटा ही लिखिए। इस 1 महीने में अगर आप 1 घंटा भी लिखते हैं, उन चीजों को लिखिए जो आपके एग्जाम में आने वाले हैं। उन चीजों को लिखिए। उन प्रश्नों और उत्तरों को लिखिए जो आपके एग्जामिनेशन के लिए हाइली इंपॉर्टेंट है। उससे क्या होगा कि आपके लिखने की प्रैक्टिस भी होगी और साथ ही साथ वो क्वेश्चन याद भी होंगे। अब लिखने की प्रैक्टिस होगी तो उसका फायदा क्या होगा? देखिए मैंने बहुत सारे बच्चों को देखा है एग्जामिनेशन हॉल में। आंसर उनको याद था। आंसर याद था और याद होने के बावजूद वह समय की कमी की वजह से अपने आंसर पूरा नहीं लिख पाते। मतलब जितना आंसर उनको देना होता है उसमें कुछ क्वेश्चन उनके छूट जाते हैं समय के अभाव में। टाइम पास हो जाता है और वो पूरा अपना नहीं लिख पाते। ये होता क्यों है? होता ये है कि लिखने की प्रैक्टिस ना होने की वजह से बच्चे आराम आराम से लिखते रह जाते हैं और समय हो जाता है खत्म। और वहां पर मालूम पड़ता है कि अब हमारे पास क्वेश्चन है उसका आंसर भी याद है पर समय नहीं है लिख नहीं पाते उस वक्त कितना अफसोस होता होगा आप अंदाजा नहीं लगा सकते हैं ये जिस पर बीतती है वही कह सकता है तो ऐसा ना हो इसके लिए लिखने की प्रैक्टिस भी होनी चाहिए।

रिवीजन पर फोकस: मॉडल सेट्स और प्रीवियस ईयर पेपर्स सॉल्व करें

और तीसरा काम आपको क्या करना है कि बचे हुए समय में ज्यादा से ज्यादा रिवीजन करना है। रिवीजन में आप क्या कर सकते हैं? तो रिवीजन में आप मैक्सिमम मॉडल सेट हल कीजिए। बिहार बोर्ड ने जो मॉडल सेट जारी किया वो हल कीजिए। या फिर मार्केट में और भी अलग-अलग पब्लिकेशन के मॉडल सेट आए हुए हैं। उन मॉडल सेट्स को हल कीजिए और सिर्फ मॉडल सेट को हल ही मत कीजिए बल्कि टाइम लिमिट के अंदर हल करने का प्रयास कीजिए। क्योंकि आप जानते हैं कि एग्जामिनेशन में आपको 15 मिनट क्वेश्चन पढ़ने के लिए पढ़ के समझने के लिए और तीन घंटा एग्जाम देने के लिए और मैट्रिक में जो प्रैक्टिकल वाले सब्जेक्ट है उसके उसमें ढाई घंटा एग्जाम के लिए 15 मिनट जो क्वेश्चन पढ़कर समझने का समय होता है वो मिलता है आपको। अब ये सवा तीन घंटे का जो समय मिल रहा है इस सवा तीन घंटे के समय के अंदर ही आपको अपने मॉडल सेट के प्रश्नों को हल करने का प्रयास करना है।

मैक्सिमम ज्यादा से ज्यादा मॉडल सेट हल कीजिए। ज्यादा से ज्यादा आप प्रैक्टिस सेट हल कीजिए। ऑफिशियल भी और नॉन ऑफिशियल भी। साथ ही साथ जो प्रीवियस ईयर क्वेश्चन पेपर है उनको भी देखिए। उनको भी सॉल्व करने का प्रयास कीजिए। और रिवीजन में आपको एक चीज और शामिल करना है जो अलग-अलग साल के क्वेश्चन बैंक होते हैं। उस क्वेश्चन बैंक में आपने आपने देखा होगा कि कुछ-कुछ क्वेश्चन के सामने वो क्वेश्चन किस साल आया था। किस एग्जाम में आया था? एनुअल में, कंपार्टमेंटल में वो लिखा हुआ होता है। वो अगर कोई क्वेश्चन जिस जिसको आप देखते हैं कि उसके सामने कई सारे साल 2000 22 भी लिखा हुआ है, 24 भी लिखा हुआ है, 25 भी लिखा हुआ है, एनुअल भी लिखा हुआ है, कंपार्टमेंटल भी लिखा हुआ है। अगर ऐसा मिलता है तो समझिए कि वो हाइली इंपॉर्टेंट क्वेश्चन है और वो बार-बार रिपीट हो रहा है। ऐसे क्वेश्चन को क्वेश्चन बैंक में विशेष करके उन पर ध्यान दीजिए। उनको याद कीजिए। इससे क्या होगा कि ऐसे क्वेश्चन जो बार-बार रिपीट होते हैं वो जब बार-बार रिपीट हो रहे हैं तो 26 में भी रिपीट हो सकते हैं। इसलिए उनसे आपको फायदा मिल सकता है।

ओएमआर शीट भरने की टिप्स: समय बचाएं और गलतियां टालें

और ये राइटिंग की जो मैंने बात की उसका फायदा केवल कॉपी में मिलेगा। लेकिन एक काम आपको और करना है जो जिसका फायदा आपको ओएमआर शीट में मिलना है। देखिए मेरा देखा हुआ है एग्जामिनेशन हॉल में चूंकि मैं काफी करीब से मैं देख चुका हूं इस चीज को और हर साल देखता हूं। तो जो ओएमआर शीट मिलता है ना मैट्रिक इंटर बच्चों को उसमें जो गोलगोल करना होता है सर्किल को पेन से जो फिल करना होता है भरना होता है ना वो बच्चे जो है ना फास्ट नहीं भर पाते और अगर कोई फास्ट करने की कोशिश करता भी है तो उनका पेन उस सर्किल से गोले से बाहर निकल जाता है तो इसके लिए पहला तो ये काम करना है आपको कि एक ऐसा पेन रखना है ब्लैक कलर का पहले से लेकर के और थोड़ा चला करके भी कि जो थोड़ा मोटा चलता हो कम से कम 1 एमएम या उससे ऊपर का जो है ना पेन होना होना चाहिए। ठीक है? मोटा जो चलता हो। ठीक है? वैसा पेन होना चाहिए और बिल्कुल न्यू भी नहीं होना चाहिए। वो आप दो-चार दिन उसको चला लीजिए। उससे क्या होता है कि स्मूद हो जाता है। अब वो पेन आपको लेके जाना है ओएमआर शीट रंगने के लिए। उससे क्या होगा ना कि आपको ओएमआर शीट रंगने में समय कम लगेगा।

और ओएमआर शीट रंगने का सबसे अच्छा तरीका क्या होता है कि बीच से शुरू कीजिए और पूरे गोले को भरिए। कई बार बच्चे गलती करते हैं कि गोले को या तो आधा ही भरते हैं या पूरा नहीं भरते। या फिर भरते तो हैं पर बीच-बीच में खाली रह जाता है। ऐसी स्थिति में ओएमआर शीट को रीड करने वाली जो मशीन होती है ना वह ओएमआर शीट को रीड नहीं कर पाती और उस क्वेश्चन का आंसर जो सही होना चाहिए था उसका भी नंबर बच्चे को नहीं मिल पाता है। तो ओएमआर शीट रंगने की गोले को भरने की प्रैक्टिस भी पहले से कर लीजिए थोड़ी सी ताकि एग्जामिनेशन हॉल में आपको उसको रंगने में टाइम ना लगे और सिर्फ ओएमआर शीट पर ही गोला नहीं करना है। आपको अटेंडेंस शीट पर भी गोले करने हैं तो सब में काम आएगा। इसलिए ये भी आपको ध्यान रखना है।

निष्कर्ष: कॉन्फिडेंस के साथ एग्जाम दें

इसके अलावा भी कुछ टिप्स मैं आपको एग्जाम से पहले पहले देता रहूंगा ताकि आपके सामने जो समस्याएं आती रहती है वो आपको नहीं आ सके। आप बिल्कुल कॉन्फिडेंट हो के एग्जामिनेशन हॉल में जा सकें। इस वीडियो के लिए फिलहाल इतना ही। आप अभी जो रिवीज़ कर रहे हैं उसमें कहां पर दिक्कत आ रही है या कोई अगर आपका दूसरा कोई सवाल है तो भी कमेंट में आप पूछ सकते हैं। उसके बाद मैं:

ये टिप्स छात्रों की वास्तविक समस्याओं पर आधारित हैं और इन्हें अपनाकर आप अपने बोर्ड एग्जाम में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। याद रखें, तैयारी में निरंतरता और सकारात्मक दृष्टिकोण सबसे महत्वपूर्ण है।

saniya kumari

Saniya kumari मैं "देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद के जन्म भूमि " SIWAN का रहने वाली हूँ और मेरी पहचान एक डिजिटल क्रिएटर, ब्लॉगर, और यूट्यूबर के रूप में है। मैं पिछले 6 वर्षों से लगातार Education से संबंधित सभी प्रकार की जानकारी उपलब्ध कराते आ रहा हूँ। मेरा मकसद है कि हर व्यक्ति को डिजिटल जानकारी और संसाधनों का लाभ मिल सकें, चाहे वह किसी भी क्षेत्र में हो। मैंने इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से सरकारी योजनाओं, शिक्षा, नौकरियों, और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का लक्ष्य रखा है। मुझे इस बात की खुशी है कि मैं अपने राज्य और देश के विकास में इस छोटे से योगदान के माध्यम से मदद कर पा रहा हूँ।

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